Sunday, 15 December 2013

जीवन दर्शन का प्रभाव

कभी-कभी सब चीजों को देखते हुए मुझे ऐसा लगता हैं कि उनके प्रति उत्‍पन्‍न होने वाले अनुभव सभी के एक जैसे ही होते हैं। बस इन्‍हें देखने का सभी का नज़रिया अलग-अलग हो जाता है। क्यूंकि सभी मनुष्यों को एक सा ही तो बनाया है विधाता ने। सबके पास सब कुछ एक सा ही तो है। एक सा चेहरा, एक सा दिमाग, एक सा दिल और एक सी आत्मा, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं व्‍यक्तिगत अनुभव के स्‍तर पर सभी एक-दूसरे से भिन्न हैं। इस स्‍तर पर सब की सोच अलग हो जाती है। चीजों को देखने-परखने का नज़रिया बदल जाता है,लेकिन चीज़ें वही हैं।... 

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