Sunday, 22 December 2013

फुटबाल मैच का कुछ खट्टा कुछ मीठा अनुभव…

मैं उस रात की बात करती हूँ जब हमें भी यहाँ इस अद्भुत खेल को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस दिन मैंने पहली बार देखा वह माहौल जिसकी लोग बातें करते है। जिसके विषय में मैंने केवल सुन रखा था मगर देखा कभी नहीं था, इसलिए शायद जब वहाँ जाने का कार्यक्रम बना। तब मैं मन ही मन बहुत उत्साहित थी, तेज़ बारिश और पैर में तकलीफ होने के बावजूद भी मैंने वहाँ जाना ज्यादा ज़रूरी समझा था। क्यूंकि मुझे लगा, ऐसे मौके बार बार नहीं आते। जो अभी मिल रहा है उसे ले लो, क्या पता कल हो न हो। यही सोचकर हम चले भरी बारिश में वेम्बले स्टेडियम। वहाँ पहुंचे ही थे कि लोगों की भीड़ का एक ऐसा हुजूम देखा कि आंखो को यक़ीन ही नहीं आया कि महज़ एक खेल को देखने के लिए इस कदर लोग पागल है
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