Sunday, 26 January 2014

केवल एक सोच

कल अपनी एक सहेली से बात करते वक्त अचानक उसने बात काटते हुए कहा, ‘यार…! मैं बाद में बात करती हूं। कुछ गंभीर बात है। यहाँ अपना करीबी रिश्तेदार गुजर गया है।’ सुन कर मैंने कह तो दिया कि ठीक है बाद में बात करेंगे लेकिन दिमाग में जैसे बहुत कुछ घूमने लगा। बाल्यकाल में अपनी नानी, दादी और फिर उसके बाद अपने नाना की मृत्यु देखी। चारों ओर ग़मगीन माहौल में माँ का रो-रोकर बुरा हाल देखा लेकिन यह सब देखने के बाद भी मेरी आँखों में कभी आँसू की एक बूंद भी नहीं उभरी। ....आगे पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें...
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