Sunday, 29 December 2013

विदेश का खोखला आकर्षण

आज के इस आधुनिक युग में फर्राटेदार अँग्रेजी बोलता बच्चा सभी को बहुत लुभाता है। विदेश में शिक्षा ग्रहण करना भारत में हमेशा से ही बड़े गर्व की बात समझी जाती रही है। अब भी ऐसा ही प्रभाव व्‍याप्‍त है। पहले केवल उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए ही बच्चों को विदेश भेजा जाता था, लेकिन आज के अभिभावक ये चाहते हैं कि उनके बच्‍चे की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विदेश में ही हो। इसमें माता-पिता को ज्यादा गर्व होता है। जबकि वास्‍तविकता कुछ और ही है। ...

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Sunday, 22 December 2013

फुटबाल मैच का कुछ खट्टा कुछ मीठा अनुभव…

मैं उस रात की बात करती हूँ जब हमें भी यहाँ इस अद्भुत खेल को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस दिन मैंने पहली बार देखा वह माहौल जिसकी लोग बातें करते है। जिसके विषय में मैंने केवल सुन रखा था मगर देखा कभी नहीं था, इसलिए शायद जब वहाँ जाने का कार्यक्रम बना। तब मैं मन ही मन बहुत उत्साहित थी, तेज़ बारिश और पैर में तकलीफ होने के बावजूद भी मैंने वहाँ जाना ज्यादा ज़रूरी समझा था। क्यूंकि मुझे लगा, ऐसे मौके बार बार नहीं आते। जो अभी मिल रहा है उसे ले लो, क्या पता कल हो न हो। यही सोचकर हम चले भरी बारिश में वेम्बले स्टेडियम। वहाँ पहुंचे ही थे कि लोगों की भीड़ का एक ऐसा हुजूम देखा कि आंखो को यक़ीन ही नहीं आया कि महज़ एक खेल को देखने के लिए इस कदर लोग पागल है
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Sunday, 15 December 2013

जीवन दर्शन का प्रभाव

कभी-कभी सब चीजों को देखते हुए मुझे ऐसा लगता हैं कि उनके प्रति उत्‍पन्‍न होने वाले अनुभव सभी के एक जैसे ही होते हैं। बस इन्‍हें देखने का सभी का नज़रिया अलग-अलग हो जाता है। क्यूंकि सभी मनुष्यों को एक सा ही तो बनाया है विधाता ने। सबके पास सब कुछ एक सा ही तो है। एक सा चेहरा, एक सा दिमाग, एक सा दिल और एक सी आत्मा, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं व्‍यक्तिगत अनुभव के स्‍तर पर सभी एक-दूसरे से भिन्न हैं। इस स्‍तर पर सब की सोच अलग हो जाती है। चीजों को देखने-परखने का नज़रिया बदल जाता है,लेकिन चीज़ें वही हैं।... 

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Sunday, 8 December 2013

पुराना मोहल्ला

कुछ ऐसा है हमारी भाबो का पुराना मोहल्ला ।
मंदिरों में मंत्र उच्चारण और भजन कीर्तन से पूरे मोहल्ले का वातावरण बहुत ही शालीन महसूस हो रहा है। लोग मंदिरों में अपनी-अपनी पूजा की थाली के साथ आ रहे हैं। मोहल्ले की सभी बुज़ुर्ग महिलाएं अपनी-अपनी पूजा की टोकरी से रूई निकाल कर बाती बनाने में मग्न हैं। कोई अपनी पूरी दिनचर्या सुना रहा है तो कोई आनेवाले कल की बातें बता रहा है और कोई हर आने-जानेवाले को राम–राम कहते हुए मंदिर में अपनी हाजिरी दर्शा रहा है। बच्चे वहीं मंदिर के आस-पास खेलते हुए शोर मचा रहे हैं। मंदिर के बूढ़े पंडितजी, जिनकी कमर ज़रा झुकी हुई है, सदा किसी न किसी मंत्र का जाप करते रहते हैं और बीच-बीच में मंदिर में चल रही गतिविधियों पर नज़र भी रखे रहते हैं। अब भी उनका मंत्र जाप चल रहा है लेकिन अगर जरूरत पड़े तो वे किसी की खबर लेने में भी हिचकिचाते नहीं। 
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Monday, 2 December 2013

बार्सिलोना भाग -3 तीसरा और अंतिम भाग

दूसरे भाग में हम छोड़ ज़रूर आए थे वो गालियां...लेकिन जब तक हम वहाँ थे, तब तक कैसे छोड़ सकते थे वहाँ की गलियों को, सो अगले दिन फिर चले हम उन्हीं गलियों में कुछ नया देखने की चाह में कुछ नया पाने की चाह में और जैसा कि मैंने पहले भाग में भी बताया था। स्पेन का यह शहर बार्सिलोना गाउडी की खूबसूरत इमारतों से भरा पड़ा है। तो इस बार भी आपको यह नाम बार-बार पढ़ने को मिलेगा।

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Wednesday, 27 November 2013

बार्सिलोना भाग -2

 स्पेन यात्रा के विषय में लिखा गया मेरा यात्रा वृतांत .... बार्सिलोना -भाग-2 मेरी इस ताज़ा पोस्ट पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें। 

Friday, 15 November 2013

मेरी नई ब्लॉग साईट

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