Sunday, 26 January 2014

केवल एक सोच

कल अपनी एक सहेली से बात करते वक्त अचानक उसने बात काटते हुए कहा, ‘यार…! मैं बाद में बात करती हूं। कुछ गंभीर बात है। यहाँ अपना करीबी रिश्तेदार गुजर गया है।’ सुन कर मैंने कह तो दिया कि ठीक है बाद में बात करेंगे लेकिन दिमाग में जैसे बहुत कुछ घूमने लगा। बाल्यकाल में अपनी नानी, दादी और फिर उसके बाद अपने नाना की मृत्यु देखी। चारों ओर ग़मगीन माहौल में माँ का रो-रोकर बुरा हाल देखा लेकिन यह सब देखने के बाद भी मेरी आँखों में कभी आँसू की एक बूंद भी नहीं उभरी। ....आगे पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें...
http://mhare-anubhav.in/?p=412

Wednesday, 15 January 2014

एक शाम ऐसी भी..

अभी कुछ दिन पहले की बात है शाम को पीने के पानी का जग (जिसमें फिल्टर लगा हुआ है) भरने के लिए जब मैंने अपनी रसोई का नल खोला तो उस समय नल में पानी ही नहीं आ रहा था। घर में पानी का ना होना मेरे मन को विचलित कर गया कि अब क्या होगा। लंदन(या तथाकथित विकसित देशों) में रहने का और कोई फायदा हो ना हो मगर बिजली पानी की समस्या से कभी जूझना नहीं पड़ता। कम से कम इसके पहले तो मुझे यहाँ कभी ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ। आगे पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें। http://mhare-anubhav.in/?p=391 धन्यवाद 

Saturday, 11 January 2014

स्मार्ट फोन का ज़माना क्या कभी होगा पुराना…?

एक दौर था जब बिना फोन के भी जीवन बहुत ही सुखमय तरीके से बीत रहा था। फिर धीरे-धीरे फोन आए तो पत्रों के माध्यम से मिलने वाले सुख का भी अंत हो गया, एक तरह से देखा जाये तो जहां एक और फोन ने दूरियाँ घटा दी वहीं दूसरी ओर आपसी मेल मिलाप को बहुत कम कर दिया। इसके बाद भी लोग कहीं न कहीं संतुष्ट थे। फिर आया मोबाइल फोन इसने जैसे हमें तनाव मुक्त ही कर दिया। ऐसा हमें लगा मगर ऐसा हुआ नहीं, और फिर आए यह स्मार्ट फोन जिन्होंने पूरी दुनिया ही हमारे हाथ में रख दी। 
आगे पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें ..http://mhare-anubhav.in/?p=296  एवं अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया से मुझे अनुग्रहित करें धन्यवाद...    

Saturday, 4 January 2014

आखिर क्यूँ

कुछ दिनों पूर्व सोनी चेनल पर आने वाले धारावाहिक “मैं न भूलूँगी” का एक भाग देखा। सुना है यह नया धारावाहिक अभी-अभी शुरू हुआ है। मैंने इसके पहले इस धारावाहिक का अब तक का कोई एपिसोड नहीं देखा। लेकिन जो देखा उसने मुझे अंदर तक हिलाकर रख दिया। उस दिन मैंने देखा नायिका सड़क पर खड़ी है और रास्ते से गुज़रता हुआ कोई लड़का अचानक उस पर स्याही फेंकता हुआ निकल गया। यह दृश्य देखकर मैं सिहर उठी न जाने क्यूँ मेरे मुँह से एक प्रकार की चीख सी निकल गयी। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे साथ ही ऐसा कुछ हुआ हो और तेजाब हमले का एहसास मेरे अंदर बिजली की तरह कौंध गया। लेकिन मैं हैरान हूँ कि मात्र इस धारावाहिक के एक दृश्य से मैंने वो महसूस किया जिसके बारे में आज तक केवल सोचती आयी थी।

आगे पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें... http://mhare-anubhav.in/?p=368