Thursday, 16 June 2011

X-Factor India

याद आ गयी तो में आपको बता देती हूँ अभी-अभी जो यह एक संगीत का कार्यक्रम शुरू है न जिसका नाम x-factor है सोनी चैनल पर आप ने भी देखा होगा अभी कुछ दिन पहले मैंने Twitter पर लता मंगेशकर जी की एक tweet ढ़ी थी जिसके ज़रिये उन्होने अपने विचार प्रस्तुत किये थे जिसमें उन्होने कहा था कि उनको भी यह कार्यक्रम बहुत पसंद आया, मुझे भी यह कार्यक्रम बहुत ही अच्छा लगा क्योंकि इसमें उन लोगों को भी अपनी किस्मत और अपने शौक को लोगों के सामने लाने का मौका मिलता है जिसने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा या तालीम नहीं ली है.

खैर मैं आप सभी के साथ इस विषय पर बात करना चाहती हूँ कि संगीत क्या है वो जो शास्त्रीय संगीत, जिसकी तालीम के बिना कोई भी या किसी भी प्रकार का संगीत अधूरा होता है या, वह जो आप के कानों को अच्छा लगता है। फिर चाहे उसमें शास्त्रीय संगीत की तुलना में कितनी भी त्रुटि क्यूँ न हो या फिर, वह जो हम बिना किसी वाद्य के सुनते है या कभी-कभी खुद ही गुनगुनाते हैं। कहने वाले कहते हैं संगीत प्यार की तरह होता है जिसका कोई धर्म नहीं होता। कोई जाति भी नहीं होती, होता है तो सिर्फ संगीत जो मन को सुकून देता है जो मन को खुशी देता जो ग़म को भी मधुर बना देता है संगीत एक ऐसी चीज है जिसे जब आप खुश होते हैं तब भी पसंद करते है और जब दुःखी होते है तब भी पसंद करते है। यह कुछ ऐसी बात है जैसे एक पुरानी हिन्दी फिल्म का नाम था दुल्हन वही जो पिया मन भाये और यदि यही बात संगीत के विषय में कही जाए तो संगीत वही जो जिया मन भायेJ है ना

मुझे ऐसा लगता है की संगीत और प्रेम में कोई फर्क नहीं है जिस तरह आप का प्यार हो जाता है तो फिर कोई और मन को नहीं भाता फिर चाहे वह किसी भी जाती या धर्म का ही क्यूँ ना हो ठीक उस ही तरह जब एक बार संगीत की धुन लग जाती है तो फिर कुछ और पसंद नहीं आता फिर चाहे वो पाश्चात्य संगीत हो या हमारे हिन्दी फिल्मों के नये पुराने गीत। बस एक बार यदि गाने सुनने का चसका लग या तो फिर आप कहीं भी हो कभी बोर नहीं हो सकते और यहाँ (U.K) का तो फैशन भी यही है यहाँ बसों में ट्रेन में लोग पूरे समय अपने कानों में Head  phone के ज़रिये संगीत सुनते रहते हैं। खैर यह तो संगीत के प्रति मेरा मत है।

यही बात इस कार्यक्रम में बहुत अच्छी तौर पर उभर कर सामने आई है इसमें वो लोग भी चुने गए हैं जिसने कभी किसी प्रकार की कोई संगीत शिक्षा नहीं ली और वो भी चुने गए हैं जिसने पूर्ण रूप से संगीत की शिक्षा गृहण की है और शायद यही वजह है कि आम लोगों में भी यह कार्यक्रम लोक प्रिय हो रहा है। जिसमें कई सालों से संगीत के क्षेत्र में काम कर रहे लोग को भी चुना गया है और एक साधारण से आटो चलाने वाले को भी उसके गाने को सुन कर चुना गया। उसकी आवाज को सुन कर उसे चुना गया यही बात मुझे बहुत अच्छी लगी कई लोगों को उन की आवाज़ अच्छी होने के कारण चुन लिया गया तो कुछ ऐसे भी थे जिनको सुर की त्रुटि के कारण निकाल दिया गया, कुछ के साथ जज का दिया गया निर्णय एक दम सही लगा, तो कई बार ऐसा लगा की गलत हुआ। ऐसा मेरा अपना मत है। अन्ततः बस यही कहा जा सकता है की जिस तरह प्यार को परिभाषित नहीं किया जा सकता, ठीक उसी तरह संगीत को भी कभी भी किसी भी भाषा में परिभाषित नहीं किया जा सकता इसलिए सुनो सुनाऔ लाइफ बनाओजय हिन्द.....