Thursday, 12 January 2012

समय-समय की बात है प्यारे ....


कभी-कभी कुछ बातों के लिए कैसे समय गुज़र जाता है पता ही नहीं चलता और कभी-कभी कुछ बातों को लेकर ऐसा लगता है, जैसे वक्त चल नहीं रहा रेंग रहा है। कुछ बातों में मन करता है बस वक्त यही थम कर रह जाये और हम सारी ज़िंदगी उस एक क्षण में गुज़ार दें। वक्त के बारे में भी जब कभी गहनता से सोचो तो बस विचार आपस में उलझते ही चले जाते है। वक्त जिसने सदियाँ देखी हैं, हर अच्छा बुरा पल देखा है इस आधार पर ज़िंदगी को देखने में वक्त से ज्यादा अच्छा अनुभव और किसी का नहीं हो सकता न Smile काश वक्त के अनुभवों से भी हम कुछ सीख पाते तो शायद आज हम कहीं और ही होते। शायद इस दुनिया का नक्शा भी कुछ और ही होता। मगर हम तो उन में से हैं। जिन्हें वक्त की कद्र करना आता ही नहीं, तभी तो हम अपने अनुभवी बुज़ुर्गों की भी कद्र नहीं कर पाते।

खैर हम बात कर रहे थे वक्त की बचपन से लेकर ज़िंदगी में आने वाले हर एक पल में बस यही क्रम चला करता है। कभी किसी मोड़ पर उत्सुकता तो कभी बेहद निराशा। अब जैसे मेरे बेटे को ही ले लीजिये अभी 8 जनवरी को उसका जन्मदिन था। जिसके लिए वह इतना ज्यादा उत्साहित था कि रात भर उसे नींद ही नहीं आयी। सोचिए ज़रा मात्र 8 साल का बच्चा और खुशी के मारे उसकी नींद उड़ गई थी। रात को उठ-उठ कर पूछा उसने सुबह हो गई क्या Smile न वो खुद सोया, न उसने हमे ही सोने दिया। उस वक्त मुझे उसकी खुशी, उत्सुकता, उतावलापन, देखकर बहुत हंसी आ रही थी और साथ ही यह भी याद आ रहा था, कि शायद हम भी बचपन में अपने जन्मदिन को लेकर इतने ही उत्साहित होते होंगे जितना की वह है। हालांकि इस बार हम उसका जन्मदिन पहले की तरह बहुत धूम-धाम से नहीं मना सके क्यूंकि यहाँ उसके ज्यादा दोस्त ही नहीं है और अंग्रेजों के बच्चे हिंदुस्तानियों के घर आना पसंद नहीं करते। इस वजह से यह तो पहले ही तय था कि इस बार उसके जन्मदिन पर किसी को बुलाया नहीं जाएगा तब भी उसका उत्साह कम नहीं था। Smile

सुबह से उसने एक ही बात की ज़िद पकड़ रखी थी, कि बस सुबह ही केक काट लो और मुझे मेरे उपहार दे दो बस, और किसी चीज़ से मुझे मतलब नहीं है। बड़ी मुश्किल से हम लोगों ने शाम के 4 बजाए क्यूंकि सुबह से सबके फोन आ रहे थे और उस दिन काम भी बहुत था। साहबज़ादे की पसंद के पकवान जो बनाने थे मुझे,Smile हुकुम तो पूरा करना ही था। जिसके चलते उस दिन सुबह केक काट पाना संभव ही नहीं था, मगर उसने ऐसी ज़िद पकड़ी थी कि मेरे तो कान पक गए थे सुन-सुन कर, कि मम्मा मैं पहले उपहार खोल लूँ, फिर केक काट लूँगा। Smile सच्ची ऐसे वक्त में लगता है यह वक्त चल क्यूँ नहीं रहा है। घड़ी रुकी हुई सी नज़र आने लगती है और जब परिस्थितियाँ विपरीत हों तो लगता है इतनी जल्दी क्या है इस वक्त को, जो भागा चला जा रहा है जैसे जब छुट्टियों में किसी के घर जाते हैं तब समय का पता ही नहीं चलता और घर वापसी का दिन आ जाता है। तब ऐसा ही लगता है, अभी तो आए थे। इतनी जल्दी वापस घर लौटने का समय भी हो गया। रोज़-रोज़ किसी न किसी बात को लेकर रुकते चले वक्त के अनुभव लगभग रोज़ ही होते हैं।

आपको क्या लगता है घर का काम करते वक्त या फिर ऑफिस का काम करते वक्त आपको भी ऐसा ही अनुभव होता होगा न किसी काम में मन लग गया तो पता ही नहीं चला कब सुबह से शाम हो जाती है। वरना सारा दिन बस घड़ी देख-देख कर ही गुज़रता है कि अब 1 बाजा है अब 2 अब 3 ...है ना SmileSmileलगता है जैसे तैसे शाम हो और दिल से निकलता है "सुबह से यूं हीं शाम होती है उम्र यूं ही तमाम होती है" जैसे अक्सर कामकाजी महिलाओं को लगता है घर पर पूरा दिन कैसे बिताएँगे यार...उफ बहुत ही बोरिंग और असंभव काम है घर बैठना, रोज़ का वही काम ज़िंदगी में बहुत कुछ है करने के लिए, छुट्टी का नाम सुनकर ही उनको बुखार आजाता है.Smile और मुझ जैसी ग्रहणी को घर पर रहकर भी आने वाली छुट्टियों का इंतज़ार रहा करता है। ऐसे ही कभी तब भी लगा करता था। जब हम विद्यार्थी हुआ करते थे, खास कर परीक्षा के समय जब पर्चा लिखने की नौबत आती थी, तब 3 घंटे भी कम लगते थे और परीक्षा के वक्त ऐसा लगता था और कितने लम्बे समय तक चलेंगे, यह पर्चे तब पापा अक्सर समझाते थे। बेटा हाथी निकल गया है पूँछ बाकी है, यह भी निकल ही जाएगी हा हा हा Smile

उस दौरान ऐसा लगता था कब परीक्षा से छुटकारा मिले कब छुट्टियाँ आयें और कब जल्दी से कहीं घूमने जाने का मौका मिले।

ज़िंदगी में ऐसे ना जाने कितने ऊंचे नीचे पल आते जाते हैं
जब ऐसे अनुभवों से हम गुजरते हैं।
कुछ अनुभव अच्छी सीख देकर जाते हैं
तो कुछ बुरी भी, फिर भी हम
बहुत कम कुछ सीखकर 
उसे अपनी वास्तविक ज़िंदगी में अपना पाते है 
इस दौरान ना जाने कितने लोग
हमारे जीवन में आते हैं, चले जाते है 
और ज़िंदगी एक रेल की तरह 
वक्त कि पटरी पर दौड़ती चली जाती है 
जिसमें खिड़की से बाहर देखने पर लगता है 
जैसे सब कुछ पीछे छूटता चला जा रहा है 
और ज़िंदगी बस रेल के स्टेशन की तरह 
पड़ाव दर पड़ाव पार करके आगे ही चलती चली जा रही है 
सारे रिश्ते-नाते यार-दोस्त अपने-पराये 
सब पीछे छूट जाते हैं 
जिसे वक्त देख रहा होता है। 
और शायद जब ज़िंदगी का आखरी 
स्टेशन आता होगा 
तब हो न हो वक्त सवाल पूछता ज़रूर होगा 
कि तुमने इस ज़िंदगी नुमा रेलगाड़ी के सफर में 
क्या "खोया क्या पाया" 
जो अब तुम किसी बात पर अफसोस करते हो 
या खुश होते हो, 
तुम खाली हाथ ही आए हो, मैंने देखा था 
और खाली हाथ ही यहाँ से जाओगे  
हाँ फर्क सिर्फ इतना है कि 
जब तुम इस दुनिया में आए थे 
तब तुम्हारी अपनी कोई इच्छा नहीं थी 
खुशी और ग़म का तुम्हें एहसास नहीं था 
मगर अब जब तुम इस दुनिया से जाओगे 
तब ज़रूर तुम अपने साथ कुछ मीठी यादें तो कुछ कडवे अनुभव लेकर जाओगे
क्यूंकि इसी का नाम ज़िंदगी है और शायद वक्त और ज़िंदगी एक ही सिक्के के दो पहलू है.....
- पल्लवी                  

54 comments:

  1. जन्मदिन को लेकर कुछ ऐसा ही उन्माद होता है बच्चों में।

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  2. सर्वप्रथम जन्म-दिन की प्यार भरी शुभकामनायें कहिएगा.इस बहाने आलेख वक़्त से आत्मीय मुलाकात कर गया वरना वक़्त के बारे में सोचने का वक़्त कहाँ मिलता है.

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  3. बचपन ..जीवन का अभिन्न हिस्सा होता है , जितना उत्साह , इस उम्र में होता है अगर वही उत्साह और भोलापन हम जीवन भर वैसा ही रख पाए तो जीवन जीने का आनंद ही आ जाये ...आपके बेटे को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ......!

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  4. तुम खाली हाथ ही आए हो, मैंने देखा था
    और खाली हाथ ही यहाँ से जाओगे
    हाँ फर्क सिर्फ इतना है कि
    जब तुम इस दुनिया में आए थे
    तब तुम्हारी अपनी कोई इच्छा नहीं थी
    खुशी और ग़म का तुम्हें एहसास नहीं था
    मगर अब जब तुम इस दुनिया से जाओगे
    तब ज़रूर तुम अपने साथ कुछ मीठी यादें तो कुछ कडवे अनुभव लेकर जाओगे
    क्यूंकि इसी का नाम ज़िंदगी है

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  5. बिल्‍कुल सही कहा है आपने, जन्‍मदिन का उत्‍साह बच्‍चों में बेहद होता है ... साथ में उपहार खोलकर देखने का .. किसने क्‍या दिया ..

    शुभकामनाओं सहित बधाई ।

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  6. जन्मदिन की शुभकामनाएँ !
    आशीर्वाद!

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  7. :) janmdin maran din sabka apna utsaah.aur sabke apne anubhav...sach hai mere papa bhi ase hi samjhte the exam time me....

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चा मंच पर

    charchamanch.blogspot.com

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  9. जन्म दिन के मामले में तो खैर सभी बच्चे एक से होते हैं.हाँ रही समय की बात तो एक और चीज़ है जिसमें समय का पता ही नहीं चलता ...न दिन होती है न रात..और वो है "ब्लोगिंग " :):)

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  10. आज -कल बच्चे जन्मदिन को लेकर काफी उत्साह में रहते हैं ...एक तरह से अच्छा भी लगता है ,उनके साथ -साथ हम भी आनंदित हो जाते हैं .आपके बेटे को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ....

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  11. दोस्त को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। (belated)
    बहुत अच्छा लगा आपका यह आलेख।

    सादर

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  12. आपको लोहड़ी हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 13/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  13. इसीलिए लगता है --हम भी अगर बच्चे होते !
    वक्त भी जैसे गियर बदलता है ।

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  14. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  15. जन्मदिन की बहुत२ बधाई शुभकामनाए,....

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  16. बहुत सुंदर प्रस्तुति,आलेख अच्छा लगा,....
    welcome to new post --काव्यान्जलि--यह कदंम का पेड़--

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  17. सुंदर प्रस्तुति के लिए आभार।
    लोहड़ी की शुभकामनाएं।

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  18. दोस्त को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ......!

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  19. एक अच्छे भाव की सफल प्रस्तुति - सुन्दर
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  20. बिलकुल जी .. वक्त वक्त की बात है ... बेटे को जन्मदिन की शुभकामनायें .. जिंदगी का फलसफा अच्छा लगा .

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  21. बहुत दिनों बाद आपके blog पर आना हुआ.

    अच्छी पोस्ट,

    लोहड़ी की ढेर सारी शुभकामनायें

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  22. जन्मदिन उपहारों, पकवानों और धूम-धमाल का संगम होता है. बच्चों के लिए यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं होता. हमारे नन्हें मित्र को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें.

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  23. आप सभी आदरणीय पाठकों और मित्रों को मेरे बेटे के जन्मदिन पर आशीर्वाद और शुभकामनयें देने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार... :)

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  24. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  25. आजकल बच्‍चें के जन्‍मदिन को इतना महत्‍व दिया गया है कि उसके लिए वही सबसे बड़ा त्‍योहार बन गया है। इसलिए सभी बच्‍चों को इतनी उत्‍सुकता रहती है।

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  26. बहुत अच्छी सुंदर प्रस्तुति,बेटे के जन्म दिन की बहुत२ बधाई सस्नेह प्यार
    new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....

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  27. बेहतरीन काव्यमयी अबिव्यक्ति , मुबारकबाद्।

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  28. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  29. सही कहा आपने, वक्त और जिंदगी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
    वक्त की बात ही निराली है, कभी धीमा चलता है और कभी तेज !

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  30. बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट " हो जाते हैं क्यूं आद्र नयन पर ": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

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  31. sachmuch..........ek bahaav sa ...bahaa le gaya apne sang...is bhaavpoorna prastuti ke liye aabhaar

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  32. बेटे को जन्म-दिन की ढेर सारी बधाईयाँ। बहुत समय बाद देखा ब्लॉग अच्छा लगा आपका लेखन। धन्यवाद आपने अपने ब्लॉग का लिंक दिया मै नई-पुरानी हचल पर रविवार की हलचल में इसे अवश्य लूँगी।
    शानू

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  33. बच्चे कब बडे हो जाते पता ही नहीं चलता... बडे हो जाते है, शादीशुदा हो जाते हैं.... तब अहसास होता है कि हम बूढे हो जते हैं॥

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  34. badhiya aalekh.... aapke bete ko janm din kee shubhkaamnaayen

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  35. बेटे को जन्म दिन की बधाई। मुझे तो अपना बचपन याद आ गया।

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  36. हमारा बचपन इसी रूप में लोटकर आता है. और हम पूरे होशो हवाश में उसका दुवारा लुफ्त उठा सकतें हैं. यदि हम बोअरिंग हो रहे तो लाइफ में तो एक नए आनंद का अनुभव कर सकतें हैं आध्यात्म की दुनिया में उतर कर.

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  37. कुछ तकनिकी खराबी के कारण शारदा जी यहाँ कमेंट नहीं कर पा रहीं थी तो उन्होने अपना कूमेंट मेल द्वारा भेजा है।
    Pallvi ji ,
    itne pyaar se bulane ka shukriya , aapke blog par comment nahi kar pa
    rahi hoon ..khud hi post kar leejiye , lekh achchhha lagaa , jaise
    khud se baate karte subah se sham ho jaaye ...bas padhate padhte kab
    khatm ho gaya ...pata nahi chala ...ye khyaal aaya ki koi lauta de
    meri vo hi arunima ....

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  38. बेटे के जन्म दिन पर बहुत बहुत हार्दिक बधाई.
    आपकी पोस्ट और कविता पढते हुए अंत आ गया ,पता ही नही चला.
    सुन्दर रोचक प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    'हनुमान लीला -भाग ३'प्रकाशित की है.

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  39. सच में वक़्त की बात है ही , इस लेख के बहाने बहुत सटीक सा भी कह दिया आपने ...बेटे को शुभकामनायें, स्नेह .....

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  40. बहुत सुंदर काव्यमई प्रस्तुति, सुंदर रचना,..बधाई
    new post...वाह रे मंहगाई...

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  41. पल्लवी जी,आपकी प्रस्तुति को सुनीता जी की हलचल में देखकर बहुत अच्छा लगा.
    आपकी प्रस्तुति का अंदाज निराला है जी.
    आभार.

    आपका मेरे ब्लॉग पर इंतजार है.

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  42. पल्लवी जी सबसे पहले तो आपके बेटे को बहुत स्नेह और देर से ही सही जन्मदिन की बधाईयाँ. आपने तो इस लेख में दिल की बात ही लिख डाली हैं. ऐसे अनुभव हम सभी जीवन के विभिन्न चरणों में होता है. कविता में भी गज़ब के भाव हैं.

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  43. आज 22/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति मे ) पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  44. Vah Pallvi ji behad akarshak post .....badhai.

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  45. धन्यवाद दोस्तों एक बार फिर आप सभी आदरणीय पाठकों एवं मित्रों को मेरे बेटे के जन्मदिन पर आशीर्वाद और शुभकामनायें देने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया... कृपया यूं ही संपर्क बनाये रखें... आभार :-)

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  46. "samay aur shabd" insan ke shikaari hain---Kurratul-ain-hyder.


    aapne theek likha hai..samay ba syunhi guzarat jata hai aur ek din aisa aata jab ham bache khuche lamhon ka hisaab lagaane baithte hain ki kitna nafa hua aur kitna nuksaan..

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  47. अरे मैंने तो विश भी नहीं किया...:( अगर एक महीने बाद भी बिलेटेड बर्थडे
    एप्लीकेबल है तो 'बिलेटेड हैप्पी बर्थडे' :) :)

    वैसे मुझे तो याद है की कभी कभी जन्मदिन की इक्साइट्मन्ट मुझे भी इतनी रहती थी की
    रात भर नींद ही नहीं आती थी, एक अलग ही फिलिंग थी वो..:):)

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  48. एक और बात याद आ गयी इस पोस्ट से,
    अंतिम इम्तिहान के वक्त भी मुझे बड़ी इक्साइट्मन्ट रहती थी,
    मुझे जल्दी जल्दी अपने पेपर खत्म कर के बाहर निकलने की उत्सुकता रहती थी...शायद येही एक कारण है की हर अंतिम इम्तिहान में मेरे नंबर भी ज्यादा अच्छे नहीं आते थे, एक दो पेपरों में अच्छे नंबर आ भी गए थे..

    पुरे इंजीनियरिंग में बस दो पेपर ऐसे थे जिनमे मैं पुरे तीन घंटे बैठा हूँ...मुझे हमेशा तीन घंटे बहुत ज्यादा लगते थे..दो या हद से हद ढाई घंटे में मैं पेपर खत्म कर दिया करता था..
    (नोट:इसका ये मतलब नहीं की मैं बहुत अच्छा विद्यार्थी था..ना तो मैं अपने ब्रांच का टॉपर था न ही कोई इंटेलीजेन्ट छात्र...:) )

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  49. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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